Month: January 2016

तन्हाई

आवाज़ों का क़ाफ़िला है! फिर भी क्यों तन्हाई है । दोस्तों की महफ़िल है ! ना जाने क्यों फिर भी यूँ अकेला हूँ । रंग ही रंग हैं! पर सब बेरंग है । फूलों के मौसम में यह केसी पतझड़ है ! ख़ुशी के दिन … Continue reading तन्हाई